तलाश
कभी कभी मुकम्मल की तलाश हमें आगे बढने से रोकती है...जार्ज विल
कभी कभी मुकम्मल की तलाश हमें आगे बढने से रोकती है...जार्ज विल
Posted by सुबोध at 7:17 PM | 0 comments
अपनी सीमाओं पर सोचना बंद करो...बस संभावनाओं को तलाशो...टेरी जोसफसन
Posted by सुबोध at 12:20 AM | 0 comments
तुम एक बैठी हुई चिड़िया को मार सकते हो।
तुम एक उड़ती हुई चिड़िया को मार सकते हो।
तुम उड़ने को तैयार एक चिड़िया को मार सकते हो।
लेकिन तुम दूसरी चिड़िया में उड़ने की इच्छा को नहीं मार सकते।
Posted by सुबोध at 10:20 AM | 1 comments
सिर्फ मरी हुई मछलियां ही बहाव के साथ बहती हैं.....मैल्कम मगरिजिस
Posted by सुबोध at 11:11 AM | 0 comments
ज़िंदगी कितनी आसान है...लेकिन हम उसे मुश्किल बनाने पर तुले रहते हैं...कन्फ्यूशियस
Posted by सुबोध at 11:54 AM | 0 comments
छोटी चीजों को ठीक कर लो...बडी़ चीजें खुद ठीक हो जाएगीं....डेल कारनेगी
Posted by सुबोध at 11:36 AM | 1 comments
सपने वो नहीं होते जो बंद आंखों से देखे जाते हैं...सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते...
Posted by सुबोध at 8:49 PM | 0 comments
Christopher Gardner: You gotta trust me, all right?
Christopher: I trust you.
Christopher Gardner: 'Cause I'm getting a better job
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Christopher Gardner: I met my father for the first time when I was 28 years old. I made up my mind that when I had children, my children were going to know who their father was.
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Christopher Gardner: Hey. Don't ever let somebody tell you... You can't do something. Not even me. All right?
Christopher: All right.
Christopher Gardner:
You got a dream... You gotta protect it. People can't do somethin' themselves, they wanna tell you you can't do it. If you want somethin', go get it. Period.________________________________________
________________________________________________________________________________Martin Frohm: What would you say if man walked in here with no shirt, and I hired him? What would you say?
Christopher Gardner: He must have had on some really nice pants.
Posted by सुबोध at 1:30 PM | 0 comments
आज को पकड़ लो...और कल में कम से कम विश्वास करो.....(सौजन्य दैनिक भाष्कर)
Posted by सुबोध at 11:38 AM | 0 comments
महज अच्छा होना ही काफी नहीं...हमें किसी मकसद के लिए अच्छा होना चाहिए...थोरो
Posted by सुबोध at 10:48 AM | 0 comments
मैं न अपने भविष्य में जीता हूं...न अतीत में..मैं तो बस अपने वर्तमान से मतलब रखता हूं...अगर तुम अपने वर्तमान में मन लगाकर जी सको तो तुम हमेशा सुखी रह सकते हो...अल्केमिस्ट ( उपन्यास )
Posted by सुबोध at 10:13 AM | 0 comments
मैं रोया परदेस में भीगा मां का प्यार
दुख ने दुख से बात की बिन चिटठी बिन तार
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आंखो भर आकाश है बाहों भर संसार
लेके तन के नाप को घूमें बस्ती गांव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पांव
सबकी पूजा एक सी अलग अलग हर रीति
मस्जिद जाए मौलवी कोयल गाए गीत..
पूजा घर में मूर्ति मीरा के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी उसके उतने दाम
नदिया सीचें खेत को तोता कुतरे आम..
सूरज ठेकेदार सा सबको बांटे काम...
सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर...
जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फकीर..
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रुप
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप..
सपना झरना नींद का...
जागी आंखे प्यास...
पाना खोना खोजना सांसो का इतिहास
चाहें गीता वाचिए या पढ़िये कुरान
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ग्यान... .
Posted by सुबोध at 7:03 PM | 0 comments
चलिए कुछ ऐसा करें जो एनर्जेटिक हो...क्योंकि एनर्जी हम सबमें हैं...इतनी की चाहें तो आसमान को जमीं पर ले आएं..तो कुछ बातें जो अक्सर पन्ने पलटते पलटते सामने आ जाती हैं...छोटी बातें लेकिन उतनी ही बड़ी...
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1..यदि मन ही मैला है तो तन के कपड़े धोने का कोई फायदा नहीं...
2..वही करो जिससे तुम डरते हो..वही हिम्मत है....एडी रिकनबाकर
3..निर्णय लेने से ऊर्जा उत्पन्न होती है..और निर्णय न लेने से थकान...माइक हाकिन्स
4..अच्छी सेहत और अच्छी समझ जिंदगी के दो सबसे बड़े वरदान हैं...साइरस
5..जो डराता है वो खुद बुरी तरह डरा हुआ होता है...फ्रांसिसी कहावत
Posted by सुबोध at 2:37 PM | 0 comments